स्वामी विवेकनान्द और साधना
Complementary & alternative
ध्यान स्वामी विवेकनांद के जीवन और शिक्षा में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा। उसके बचपन से ध्यान पर अंजाम देने का रुख था। उसका मास्टर रामकृष्ण ने उसे एक dhyana-siddha कहा। 24 दिसंबर 1892 को, विवेकनांद कानकुमारी पर पहुँचे और तीन दिन एक बड़ी पत्थर पर ध्यान में लगे, जिससे उसने अपना जीवन व्यक्तिगत सुधार के लिए इस्तेमाल करने का निश्चय लिया। यह घटना 1892 में कानकुमारी विवेकनांद का स्वास्थ्य निश्चय के रूप में जानी जाती है। उसकी मृत्यु को दिन पर भी लंबा समय ध्यान में बिताया गया था।