माइन्टलिशन-आधारित उपचार
Complementary & alternative
मेन्टलाइज़ेशन‑आधारित उपचार या मेन्टलाइज़ेशन‑आधारित थेरेपी (एमबीटी) मनोचिकित्सा की एक समग्र रूप है, जो साइकोडायनामिक, कॉग्निटिव‑बिहेवियरल, सिस्टम और इकोलॉजिकल दृष्टिकोणों के पहलुओं को जोड़ती है। एमबीटी का विकास और मैनुअल पिटर फोनाख़ी और एंथनी बैटमेन द्वारा किया गया था, जिसे बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (बीपीडी) वाले व्यक्तियों के लिए डिज़ाइन किया गया है। इन लोगों में से कुछ असंगठित अटैचमेंट से पीड़ित हैं और उन्होंने मजबूत मेन्टलाइज़ेशन क्षमता विकसित नहीं की है। फोनाख़ी और बैटमेन मेन्टलाइज़ेशन को उस प्रक्रिया के रूप में परिभाषित करते हैं जिसके द्वारा हम अपने तथा दूसरों के कार्यों को इरादतन मानसिक अवस्थाओं के आधार पर निहित एवं स्पष्ट रूप से अर्थपूर्ण मानते हैं। एक वैकल्पिक और सरल परिभाषा है “दूसरों को अंदर से देखना और स्वयं को बाहर से देखना।” उपचार का उद्देश्य यह है कि बीपीडी वाले रोगी अपनी मेन्टलाइज़ेशन क्षमता बढ़ाएँ, जिससे भावनात्मक नियमन में सुधार हो, आत्महत्या की प्रवृत्ति और स्व‑हानि कम हो, तथा अंतरव्यक्तिगत संबंध मजबूत हों। एमबीटी का एक संस्करण एंटीसोशल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (एमबीटी‑एएसपीडी) वाले व्यक्तियों के लिए भी विकसित किया गया है, जिसे मुख्यतः समूह सेटिंग में दिया जाता है। क्योंकि एएसपीडी वाले लोग समान समझे जाने वाले साथियों से सीखने और जुड़ने की अधिक संभावना रखते हैं, एमबीटी‑एएसपीडी का फोकस ऐसे रचनात्मक समूह इंटरैक्शन को सुगम बनाना है जो मेन्टलाइज़ेशन और व्यवहार परिवर्तन का समर्थन करते हों।